आईआरडीएआई वार्षिक सेमिनार- 2012 - पॉलिसी धारक

आईआरडीएआई वार्षिक सेमिनार- 2012

 



 

आईआरडीए ने पॉलिसीधारकों के संरक्षण के बारे में वार्षिक सम्मेलनों (सेमिनारों) की एक श्रृंखला आयोजित करती है। इस श्रृंखला के तहत ‘‘पॉलिसीधारकों के संरक्षण तथा कल्याण’’ विषय पर तीसरे सेमिनार का आयोजन 2 जून, 2012 को कोलकाता में किया गया।

इस सेमिनार में चार सत्र थे- उद्‌घाटन सत्र के अलावा तीन तकनीकी सत्र थे

1 बीमा को समझना - ग्राहक के संबंध में

2 जीवन बीमा की अनुचित बिक्री की रोकथाम तथा

3अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं के साथ बीमा की टाइंग और बंडलिंग।

सेमिनार का उद्‌घाटन श्री जे. हरि नारायण, चेयरमैन, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया। तथा उन्होंने उपभोक्ता शिक्षा पर ‘बीमा बेमिसाल’ अभियान के अंतर्गत एक प्रयास के रूप में आईआरडीए की ‘उपभोक्ता शिक्षा वेबसाइट’ का विमोचन किया गयाः

सेमिनार के दौरान आईआरडीए के निम्न प्रकाशनों का भी विमोचन किया गयाः

1 चित्रकथा श्रृंखला ‘‘रंजन का बीमा से परिचय’’ का द्वितीय अंक

2 ‘‘रंजन का बीमा से परिचय ’’ के प्रथम अंक पर एनिमेशन फिल्म

3अंग्रेजी व हिंदी के अलावा 11 क्षेत्रीय भाषाओं में पॉलिसीधारकों की हस्तपुस्तिकाएँ

4उपभोक्ता मामले विभाग की वार्षिक पुस्तिका 2011-12

सेमिनार के दौरान, ‘बीमा बेमिसाल’ निबन्ध प्रतियोगिता के विजेताओं को उनके पुरस्कार तथा श्रेष्ठता प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

अपने स्वागत सम्बोधन में श्री यू. जवाहरलाल, आईआरडीए ने पॉलिसीधारकों के संरक्षण हेतु आईआरडीए की ओर से किए गए विविध प्रयासों का उल्लेख किया, जिनमें वेब-संकलकों हेतु दिशानिर्देश, दूरस्थ मार्केटिंग आदि शामिल थे।

श्री आर. चंद्रशेखरन्‌, महासचिव, सामान्य बीमा परिषद ने अपने सम्बोधन में शिक्षा, शिकायतें एवं बाज़ार आचरण मसलों के बीच संबंधों के बारे में बात की तथा पहले से रोकथाम के उपायों हेतु प्रयास के रूप में जहाँ आवश्यक हो, शीघ्र चेतावनी प्रणालियों हेतु रीयल टाइम शिकायत डेटा के विश्लेषण की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री एस. राय चौधरी, सदस्य (जीवन) आईआरडीए ने कहा कि पिछले दशक से लेकर वर्तमान तक बीमा उद्योग ने पॉलिसीधारकों से बेहतर डील करते हुए तथा उन तक बेहतर रूप में पहुंचते हुए उल्लेखनीय प्रगति की है। लोग, बीमा उत्पादों के विषय में जागरूक हो रहे हैं तथा उपभोक्ता शिक्षा के क्षेत्र में आईआरडीए के प्रयासों ने उनके हितों के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। सेवा के मानकों पर फोकस करते हुए श्री एम. रामप्रसाद, सदस्य (गैर-जीवन) ने कहा कि बीमा एक सेवा चालित उद्योग है तथा पॉलिसी खरीद के समय बीमाकर्ताओं द्वारा की गई वचनबद्धताओं को उन्हें अवश्य पूरा करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जागरूकता को उच्चतर स्तरों से नीचे तक लाना होगा, ग्राहकों का ज्ञान सशक्त बनाना होगा ताकि असंतुष्टि के स्तरों को कम किया जा सके।

अपने उद्‌घाटन भाषण में श्री जे. हरिनारायण, चेयरमैन, आईआरडीए ने कहा कि उत्पाद डिजाइन की दिशा में बीमाकर्ताओं की विधियाँ, उपभोक्ताओं के लिए लाभप्रद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पॉलिसीधारक, इस उद्योग में सबसे प्रमुख पक्ष हैं और बीमा उद्योग की वृद्धि पॉलिसीधारकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए ही की जा सकती है। उनके अनुसार, पॉलिसीधारकों की सेवा हेतु उचित प्रबंधकीय प्रविधियों को कंपनी की व्यवसाय नीति का अभिन्न अंग बनाने से सभी आयामों में व्यवसाय की वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी। हरियाणा में दुर्घटना राहत सहायता का उदाहरण देते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक विनिमय माध्यमों पर बढ़ती निर्भरता के साथ विविध फोरमों पर किए जा रहे कार्यक्षेत्रों का जिक्र करते हुए अपने भाषण का समापन किया।

द्वितीय सत्र में ‘शिक्षा के माध्यम से उपभोक्ताओं का सशक्तीकरण’, ‘बीमा पॉलिसियों में सरल भाषा’, तथा ‘बीमा उद्योग द्वारा उपभोक्ता शिक्षा’ जैसे विषयों को कवर किया गया तथा इसकी अध्यक्षता श्री आर.के. नायर, सदस्य (एफ एंड आई) आईआरडीए, ने मॉडरेटर के रूप में की। सत्र का आरंभ करते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन, वैश्विक एजेंडे का अंग है तथा उपभोक्ता शिक्षा पर फोकस, सेवाओं की अभिगम्यता तथा इनकी किफायती प्रकृति के बारे में जागरूकता सुनिश्चित करता है।

तृतीय सत्र में ‘अनुचित विक्रय की रोकथाम-उद्योग जगत की पहल’, ‘मानक प्रस्ताव फार्म/आवश्यकता विश्लेषण/परिदृश्य उत्पाद मैट्रिक्स की आवश्यकता’ तथा ‘अनुचित विक्रय पर उपभोक्ताओं का दृष्टिकोण’ जैसे विषयों को शामिल किया गया तथा इसे श्री एस. राय चौधरी, सदस्य (जीवन), आईआरडीए द्वारा मॉडरेट किया गया। पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौतियों, अनुचित विक्रय रोकने के लिए व्यवस्थित समाधानों की प्रस्तुति आदि पर चर्चाएँ की गईं।

अंतिम सत्र में ‘बीमा में टाइंग व बंडलिंग से संबंधित सरोकार’, ‘टाइंग व बंडलिंग-मध्यवर्ती दृष्टिकोण’, तथा ‘टाइंग व बंडलिंग से संबंधित उपभोक्ताओं के सरोकार’ विषयों को कवर किया गया। श्री एम. रामा प्रसाद, सदस्य (गैर-जीवन) ने अंतिम सत्र को संभाला और बंडलिंग से संबंधित सरोकारों, इसके गुणों व दोषों पर विस्तार से बहस की गई।

श्री टी. श्रीराम, वित्तीय सलाहकार, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने यह कहते हुए प्रतिभागियों का धन्यवाद किया कि मौजूदा मॉडलों को फिर से समीक्षित करने, उद्योग तथा पॉलिसीधारकों के हितों के बीच एक संतुलन कायम करने, और उद्योग के बेहतर स्व-नियमन हेतु विचार प्रक्रिया प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने सबके प्रति आभार प्रकट किया।

उपभोक्ता मामले विभाग की वार्षिक पुस्तिका 2011-12 का विमोचन भी सेमिनार के दौरान किया गया।

CAD_Annual Booklet_2012.pdf